कमल की कलम : भाग एक

मोहब्बत यूं ही नहीँ होती
ज़मीन पे चाँद लाना होता है
यहां तो पैमाइश लगती है
दरिया में किनारा लाना होता है॥

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  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 09/06/2016