प्यारा हमसफ़र

इतनी मुद्दत बाद मिले हो
किन् सोचो में गुम्म रहते हो
तेज हवा ने मुझ से पुछा
रेत पे क्या लिखते रहते हो

कौन सी बात है तुझ में ऐसी
इतने प्यारे क्यों लगते हो
मुझ से न पूछो हाल मेरा अब
तुम ही कहो की तुम कैसे हो

देख के तुझको हर पल दिल सोचे
मस्त हवा से तुम बहते हो
पास मेरे जब होते हो तोह
दिल को खुशनुमा किया करते हो

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  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 10/06/2016

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