दहकता बुंदेलखंड

जीवन की बूंदों को तरसा भारत का एक खण्ड।
सूरज जैसा दहक रहा हैं हमारा बुंदेलखंड।
गाँव गली सुनसान है पनघट भी वीरान।
टूटी पड़ी है नाव भी कुदरत खुद हैरान।
वृक्ष नहीं हैं दूर तक सूखे पड़े हैं खेत।
कुआँ सूख गढ्ढा बने पम्प उगलते रेत।
कभी लहलहाते खेत थे आज लगे श्मशान।
बिन पानी सूखे पड़े नदी नहर खलियान।
मानव ,पशु प्यासे फिरें प्यासा सारा गांव।
पक्षी प्यासे जंगल प्यासा झुलसे गाय के पांव।

5 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/06/2016
    • सुशील कुमार शर्मा सुशील कुमार शर्मा 09/06/2016
  2. विजय कुमार सिंह 09/06/2016
    • सुशील कुमार शर्मा सुशील कुमार शर्मा 09/06/2016
  3. विजय कुमार सिंह 09/06/2016

Leave a Reply