नजरया

1]सब का तु होने से सब तेरे नही होगें !
वक्त ही गीनायेंगा कितने तेरे कीतने पराये होंगे !
पर तुअपना बनाना न छोड कुछ प्यार तो कुछ तजरुबा देंगे !
(आशफाक खोपेकर)

2]सब्र ही अता करे सुकूने दिल हर हाल मे !
जीयो चाहे तवंगरी या मुफलीसी के जाल मे !
न हो शिक्वा जमाने से बचाकरो नाफरमानो से !
मेहरुमे सुकुन होकर घिरे रहोंगे शैतानों से !
(आशफाक खोपेकर)

3]खुश रहो हर हाल मे मायुसी हराम करदेती है जीना !
वक्त पीलाए कडवा घुंठ तो सजा समझकर पी लेना !
गल्ती खामीयों को ऱखो याद न उन्हे दोहराना !
माहोल बदल जाता ह वक्त के साथ तो क्युँ घबराना !
(आशफाक खोपेकर)

4] गुरबत से परहेज हमेशा होता रहा ! कमब्खत वक्त उसे करीब लाता रहा !
लाइलाज मर्ज तो नही है ये गुरबत ! हरकतो की बरकत से दुर जाने से रहा !
(आशफाक खोपेकर)

5]कभी कभी यारों ऐसा भी कीया जाऐ ! दुख दर्दऔरों का भी मेहसुस किया जाए !
अपनो की फिक्र तो सब को लगी रहती है ! गैरो पर थोडा तो करम किया जाए !
(आशफाक खोपेकर)

6]ईश्वरअल्लाह है निगेहबान क्यु होता है तु परेशान !
बनाया है हर जान्दार उसन कतरे मे दालकर जान !
तन्दुरस्ती सब से बडी नियामत है दुनिया की!
मीलेंगे और भी मौके डगमगाने न दे तु अपना इमान !
(आशफाक खोपेकर)

2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/06/2016
  2. C.M. Sharma babucm 09/06/2016

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