इंतज़ार कर लो

बारिश थमने का थोड़ा इंतज़ार कर लो,
छतरी को फैलाकर तार-तार कर लो,
हवाओं और फुहारों को भी लिपटने दो,
खुद को खुद में ही थोड़ा और सिमटने दो,
जल की धारा पाँव छूने को बेताब है कितनी,
हौले-हौले तुम उसे पांवों से छलकने दो ।

विजय कुमार सिंह

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/06/2016
    • विजय कुमार सिंह 09/06/2016
  2. योगेश कुमार 'पवित्रम' 09/06/2016
    • विजय कुमार सिंह 09/06/2016
  3. babucm babucm 09/06/2016
    • विजय कुमार सिंह 09/06/2016

Leave a Reply