सपने अपने नहीं होते

शिक़वा हमें ग़ैरों से नहीं बल्कि अपनों से है
जो अपने न हो पाये उन बेगाने सपनों से है।

अपना समझकर जिन्हें आंखों में बसाया
उन्हीं सपनों से देखो आज कितना रुलाया।

कैसे बताऊं दिल को ये अपने नहीं होते
गर अपने हो पाते तो ये सपने नहीं होते।

आरज़ू में इनकी बहुत कुछ मैंने खोया है
टूटने की कसक में इनकी दिल फिर रोया है।

खाली इस दिल में तन्हाई का अब डेरा है
आज भी इसे उसकी यादों ने क्यों घेरा है।

वीरां इस दिल में तन्हाई ही अब रहती है
चुपचाप अपनी दास्तां खुद से ही कहती है।

खामोश ये नजरें अब भी उसे ही ढूंढती हैं
काफ़िर ये निगाहें मेरी भी कहां सुनती हैं।

11 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/06/2016
    • bebak lakshmi bebak lakshmi 09/06/2016
  2. Rajeev Gupta Rajeev Gupta 08/06/2016
    • bebak lakshmi bebak lakshmi 09/06/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 08/06/2016
    • bebak lakshmi bebak lakshmi 09/06/2016
  4. babucm babucm 09/06/2016
    • bebak lakshmi bebak lakshmi 09/06/2016
  5. विजय कुमार सिंह 09/06/2016
  6. विजय कुमार सिंह 09/06/2016
  7. अभिषेक शर्मा ""अभि"" अभिषेक शर्मा 10/06/2016

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