अपनी चाहत बता दो

मेरी बात मानो, इरादा जता दो,
ज़माने को अपनी चाहत बता दो,
जीवन हमारा, हम खुद ही जियेंगे,
ज़माने के विष को हम यूँ ही पिएंगे ।
मगर ध्यान रखना, बड़ों का मान रखना,
मोहब्बत पर अपने न तुम गुमान रखना,
कोशिश करना, मान जाएँ सभी,
हमारे प्यार पर न खफा हों कभी ।
उनसे हम बने, उन्होंने ही पाला,
फूल तो हैं हम उन्हीं के प्यार वाला ।
अगर बात मेरी समझ में न आये,
दिल को तुम्हारे वो बिलकुल न भाये,
मुझसे न मिलना, मुझतक न आना,
ज़माने को भी न मिलेगा बहाना,
तुम ढूंढ लेना खुद का कोई किनारा,
मेरा साथ देगी यह नदिया कि धारा ।

विजय कुमार सिंह

9 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/06/2016
    • विजय कुमार सिंह 12/06/2016
  2. Rajeev Gupta Rajeev Gupta 08/06/2016
    • विजय कुमार सिंह 12/06/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 08/06/2016
    • विजय कुमार सिंह 12/06/2016
  4. C.M. Sharma babucm 09/06/2016
    • विजय कुमार सिंह 09/06/2016
    • विजय कुमार सिंह 12/06/2016

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