नयनों में तुम्हारे….

नयनों में तुम्हारे समंदर दिख गया,
बादल अचानक जाने क्यूँ बरस गया,
गालों से ढलकते बिन सीप के ये मोती,
सम्भालो इन्हें की मेरा दिल निकल गया ।

विजय कुमार सिंह

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/06/2016
    • विजय कुमार सिंह 12/06/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 08/06/2016
    • विजय कुमार सिंह 12/06/2016
  3. babucm babucm 09/06/2016
    • विजय कुमार सिंह 12/06/2016

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