प्रकृति के साथ रिश्ता

प्रकृति के साथ रिश्ता

जाने क्या रिश्ता है प्रकृति से
जो जुड़ गया हूं बस इसी से ।
ये ऊंचे-ऊंचे लाल काले पहाड़
बड़े वन ऊंची नीची नालियों में
शेर हमेशा जहां लगाते हैं दहाड़
फि र भी डर नही लगता है मुझे
मां का पूत हूं मैं मानूं फि र भी
दिया है जन्म क्या प्रकृति ने मुझे ।
जाने क्या रिश्ता है प्रकृति से
जो जुड़ गया हूं बस इसी से ।
सुन्दर प्यारी चारों ओर हरियाली
फ ैलती है महक शीतल वायु में
मिलती है जीवन की खुशहाली
आती हैं बहारें कांटों भरे जीवन में
राज की यह बात है हे मानव
हर कोई समझ नही पाता इसे ।
जाने क्या रिश्ता है प्रकृति से
जो जुड़ गया हूं बस इसी से ।

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