उसकी याद

उसकी याद

रह-रह कर खुले आसमान में
बिजली-सी कौंध जाती है ,
अकेले बैठे सुनसान जंगल में
मुझे वो भूली-सी याद आती है ।
होंठो का वो लालीपन
पतली कमर चंचल चितवन
बहकी हिरणी हर्षित मन
याद आता है वो सावन
मिले थे जब हमारे मन ,
वो यादें मन चित्रपट पर
फि र से दौड़-दौड़ आती हैं ।
अकेले बैठे सुनसान जंगल में
मुझे वो भूली-सी याद आती है ।
यूं वो सजधज कर आना
आते ही थोड़ा मुस्कुराना
फि र मुझसे हाथ मिलाना
कान में धीरे से यूं कहना
ले चलो दूर दूसरे जहां में
ऐसी प्रेम हिलोरें भिगो जाती हैं ।
अकेले बैठे सुनसान जंगल में
मुझे वो भूली-सी याद आती है ।

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