बिहार में बंद मधुशाला (हास्य )

बिहार में बंद हुई मधुशाला
नितीश जी ये आपने क्या कर डाला
बिहार में क्यों बंद की मधुशाला

रोज़ शाम को वो मधुशाला में मिलना
मदहोशी के आलम में वो चेहरे खिलना
क्यों छीन लिया गरीब से ज़ाम का प्याला
बिहार में क्यों बंद की मधुशाला

अब कहाँ से मिलेगा वो दीवानापन
जब गैरों से मिलता था अपनापन
अब तो लगता है जैसे हो हर दिन काला
बिहार में क्यों बंद की मधुशाला

एक ज़ाम से ही निकलता था नागिन डांस
बच्चे , बूढ़े कोई न छोड़ते थे चांस
ऐसे में अप्सरा लगती थी हर बाला
बिहार में क्यों बंद की मधुशाला

शादी समारोह सब हो अब गए बेरंग
बिना डांस के शादी की खो गयी उमंग
दूर दूर रहते हैं जीजा हो या साला
बिहार में क्यों बंद की मधुशाला

अब दिल ने धड़कना सा छोड़ दिया
जब तक ये मधु न पीया तो क्या पीया
बिना सुरा अब मुंह में नहीं जाता निवाला
बिहार में क्यों बंद की मधुशाला

धर्म, जाति के ऊपर था भाईचारा
जो ज़ाम पिलाता वो था प्राण प्यारा
प्रेम के इस भाव से खुश था ऊपरवाला
बिहार में क्यों बंद की मधुशाला

खुशनुमा चेहरों का नूर अब खो गया
इतने अच्छे बिहार को ये क्या हो गया
बीते दिन लौटेंगे ये सपना सबने है पाला
बिहार में फिर शुरू होगी मधुशाला

हितेश कुमार शर्मा

6 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 03/06/2016
    • Hitesh Kumar Sharma Hitesh Kumar Sharma 03/06/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/06/2016
    • Hitesh Kumar Sharma Hitesh Kumar Sharma 03/06/2016
  3. Rajeev Gupta Rajeev Gupta 03/06/2016
  4. Rajeev Gupta Rajeev Gupta 03/06/2016

Leave a Reply