आबरू

छोड़ दो मुझे जाने दो ,
मेरे तमन्नाओ का जहां अभी बाकी है
तेरे तिरिस्कार से छलनी इस जीवन में
मेरे सपनो का ज़हा अभी बाकी है

तेरी हैवानियत की मुझे समझ ही कहा
मेरे बाबा , माँ का प्यार अभी बाकी है
मेरे बचपन को छोड़ दे तू अभी
मेरी मासूमियत का संसार अभी बाकी है

तेरे लिए पल दो पल का फितूर सही
मेरी जिंदगी का हर पल और लम्हा अभी बाकी है
तेरी द्रन्दिगी से पनपे जख्मो से नहीं
मेरे बचपन पे मेरी मासूमियत का निशाँ अभी बाकी है

मुझे तबाह करने ,रौंदने वाले ,
मेरे गुनाहों का पता भी तोह दे मुझको
मेरे छोटे मासूम जिस्म को खरोंचने वाले
मेरी गलती का पता भी तोह दे मुझे …..

अब बस कर मुझे भी जीने दे
मेरी चुप्पी की सजा ना दे मुझे
में इस भरी दुनिया में कमज़ोर सही
तेरे ज़ुल्मो पे पडूँगी भारी …….

मेरा दिल मासूम है तोह क्या
मेरे रहनुमाओ का दिल है बड़ा
कुछ वक़्त बचा है तेरा तू बस जी ले
मेरा खुदा अभी नींद में है बड़ा ……

8 Comments

  1. विजय कुमार सिंह 01/06/2016
    • tamanna tamanna 01/06/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 01/06/2016
    • tamanna tamanna 01/06/2016
  3. Rajeev Gupta Rajeev Gupta 02/06/2016
  4. tamanna tamanna 02/06/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 03/06/2016
    • tamanna tamanna 03/06/2016

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