वाह रे नाले

वाह रे नाले, तुझको कौन खंगाले ?
नालियों का तीर्थस्थल तू,
सबको खुद में डाले,
सबकी गन्दगी को समाहित करते,
होते बड़े दिल वाले,
तू ही बता, तुझको कौन खंगाले ?
गंदे जल ढोने का जिम्मा,
फिर कचरा भी तुझी में डालें,
खुले रूप में बहता देखकर,
तुझमे ही गन्दगी निकालें,
फिर मशीनों से तुझको खंगाले ।
जहाँ कचरों ने जल रोका,
वहां मच्छर तूने पाले,
तेरे दर्द का बदला लेते,
मच्छर बीमारी वाले,
ढँक दिया तुझको, अब कैसे खंगालें ?
आयातित मोटर को मंगाया,
एक छोर से लगाकर खींचें,
दूसरे छोर तक साफ़ कर डाले,
मशीनों के खेल बड़े निराले,
चार दिनों में ही आंख झपका लें,
अभियंता संभालें, अब किससे खंगालें ?
बारिश ने झमाझम जल ढारा,
तेरे जल को न मिला किनारा,
तोड़ दिया सारे बंधन को,
उफन पड़ा घर-घर, जन-जन को,
अपनी गन्दगी थे तुझमें गिराते
अब तेरे ही जल में नहाते,
वाह रे नाले, तुझको कौन खंगाले ?

विजय कुमार सिंह

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  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 01/06/2016

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