कंचे- निर्मल कुमार पाण्डेय

सप्तरंगी
स्वप्नदर्शी
बहुरंगे
उछलते
बार बार टकराते, लड़ते
ये कंचे
कहते
उछलो
टकरावों
और टकराते रहो
जब तक उर्जा है तुम में
***
अच्छे हैं कंचे ही हमसे
टकराते तो हैं…
हम तो तनिक प्रतिरोध से ही
धराशायी हो जाते हैं.

—-निर्मल कुमार पाण्डेय

2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 27/06/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 27/06/2016

Leave a Reply