मुझे स्वर दो, मैं बोलूंगा

मुझे स्वर दो, मैं बोलूंगा,
हालात के बंद किये ताले को
साहस की युक्ति से खोलूंगा
मुझे स्वर दो, मैं बोलूंगा ।

आरक्षण की काली रात को,
स्तब्ध आँखों से देखा है,
फटे-चिटे आतंरिक-वस्त्रों को,
सबने दूरदर्शन पर देखा है,
चार दिन है जिस्म की आयु,
यह कुदरत का लेखा है,
आत्मा के अमरत्व को मैंने,
तिल-तिल मरते देखा है ।
मुझे स्वर दो, मैं बोलूंगा…..

उस बच्चे के दर्द को देखा,
जो माँ को लुटते न देख सका,
उस भाभी के दर्द को देखा,
जो नन्दों की आबरू न बचा सकी,
नारी के प्रत्येक रूप को,
कलुषित होते देखा है ।
मुझे स्वर दो, मैं बोलूंगा…… ।

भयभीत, पीड़ित जन-समूह को देखा,
जो जख्म अपना न दिखा सके,
अपराधियों को दण्डित करने की,
खुद में हिम्मत न जुटा सके,
फर्ज निभानेवाले किरदारों को,
ओहदा बचाते हुए देखा है ।
मुझे स्वर दो, मैं बोलूंगा…… ।

गौण हो गया मेरा स्वर,
यह देखकर जब मैं चीखा था,
दूर कहीं काली रात में,
क्रन्दन करता कई साया दीखा था,
पच्छियों का कोलाहल-बेचैनी,
जटायु युद्ध सरीखा था ।
मुझे स्वर दो, मैं बोलूंगा,
हालात के बंद किये ताले को
साहस की युक्ति से खोलूंगा
मुझे स्वर दो, मैं बोलूंगा ।

विजय कुमार सिंह

17 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 01/06/2016
    • विजय कुमार सिंह 01/06/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 01/06/2016
  3. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 01/06/2016
    • विजय कुमार सिंह 01/06/2016
    • विजय कुमार सिंह 02/06/2016
  4. kanukabir Kanukabir 02/06/2016
    • विजय कुमार सिंह 02/06/2016
  5. Rajeev Gupta Rajeev Gupta 02/06/2016
    • विजय कुमार सिंह 02/06/2016
  6. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 03/06/2016
  7. सुशील कुमार शर्मा सुशील कुमार शर्मा 09/06/2016
    • विजय कुमार सिंह 09/06/2016
    • विजय कुमार सिंह 16/06/2016
  8. mani mani 16/06/2016
    • विजय कुमार सिंह 17/06/2016

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