चांदनी

चांदनी

चांद की चांदनी आज
उतरी है मेरे आंगन में
मन मेरा झूम उठा है ,
पांव मेरे थिरकने लगे ।
कंपित रोएं-रोएं में
सितार जैसे बजने लगा
सातों सुर समेट लाई
पूर्व से आने वाली हवा
फू लों संग इठलाती गाती
आई है इस महीने में ।
मन मेरा झूम उठा है ,
पांव मेरे थिरकने लगे ।
चुनरी आसमान सिर ओढ़े
सुन्दर प्यारे सितारे जडक़र
लेकर ठंडी सुघड़ शीतलता
और सुगंध अंदर अपने भर
चंचल अस्थिर बहकी सी
सुवाषित लगी सांसों को करने ।
मन मेरा झूम उठा है ,
पांव मेरे थिरकने लगे ।

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