आज का दिन

आज का दिन

आज का ये सुहाना दिन
उदास है ये तेरे बिन
चारों तरफ की हरियाली
हर लेता है जो मन को
मगर यहां भी लगता नही
सब तो पास है तेरे
कभी मेरा हुआ करता जो
आंखें हर जगह करती है
बस तेरा ही दीदार
मगर दोनों के बीच है
इस जमाने की ऊंची दीवार
जिसे गिराना है हमको
हर मुश्किल से होना है पार
धरती के उस छोर पर
बुला रहा है हमको प्यार ।

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