यादें बचपन की

यादें बचपन की

कागज की कश्तियां
पानी पर तैराना,
याद आता है हमें
गुजरा हुआ जमाना ।
चंचल बुद्धि, चंचल मन
खेलने निकलते थे
रेतीले टीलों पर हम
उस बालू रेत पर
उसी रेत के घरौंदे बनाना ।
याद आता है हमें
गुजरा हुआ जमाना ।
कभी वर्षा के सीजन में
नंगे शरीर होकर
धड़ल्ले ये गलियों में
उछल कूद कर नहाना ।
याद आता है हमें
गुजरा हुआ जमाना ।
सर्दी की कडक़ड़ाती
बर्फि ली ठंड में
लसेटे रजाई अपने तन पे
चारपाई पर लेटकर
रेवड़ी मूंगफली चबाना ।
याद आता है हमें
गुजरा हुआ जमाना ।

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