हरियाली और घटाएं

हरियाली और घटाएं

हरी-भरी है हरियाली
और आई घटाएं काली,
छम-छम बरसे पानी
आई है ऋतु मतवाली ।
इन्द्रदेव हुए हैं प्रसन्न
भर अंजलि बिखेर रहे अन्न
करते सबका हृदय पावन
लाते हैं घर-घर खुशहाली ।
हरी-भरी है हरियाली
और आई घटाएं काली ।
वसुंधरा मदमस्त सी ओंटे
अमृत जैसी रस की बूंदे
दामन में समेट कर इन्हें
लाती है फि र से हरियाली।
हरी-भरी है हरियाली
और आई घटाएं काली ।
झूला झुलाए पवन देव
पेड़ों के सुन्दर पात हिले
लचकी कमर सुन्दर लगे
हर्षाती है मन को मतवाली ।
हरी-भरी है हरियाली
और आई घटाएं काली,

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