उजली सांझ

उजली सांझ

आज उजली सी सांझ
पोत काली मिट्टी से कपोल,
आकर बैठ गई सामने
चेहरा हंसमुख गोल-गोल ।
छत पर बैठे-बैठे ठाली
मैंने अपनी कलम उठा ली
और कुछ नजर न आया
सांझ पर ही——
अपनी कविता बना ली
होंठ लालिमा से लाल
आकर बैठ गई सामने
चेहरा हंसमुख गोल-गोल ।
चंचल सहमी चितवन सी
कुछ उजली कुछ मधुबन सी
चमकीला सुन्दर छरहरा बदन
आंखें मदिरा की प्याली
दांतों की चमक अद्भूत प्यारी
छाती है जैसे बिल्कु ल गोल ।
आकर बैठ गई सामने
चेहरा हंसमुख गोल-गोल ।

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