ए मालिक मौला मेरे

एक नेक इंसान बना दो ए मालिक मौला मेरे
अपनी भी पहचान बना दो ए मालिक मौला मेरे
भटके बहुत है दर बदर में ठोकरे खाये हैं मैंनें
भीख रहम की मांगे बहुत थे प्रीत न पाये है मैने
एक नेक इंसान बना दो ए मालिक मौला मेरे ।
ऐसी अकल देना तुम मुझको नीयत निर्मल बन जाए
करने लगे हम प्यार की बातें इतनी षीतल बन जाये
मालिक मेरे मौला मेरे एक नेक इंसान ।
दया धर्म और सेवा भक्ति सब कछ तुम सिखला देना
लालच से दुर ही रखना सत्य मार्ग ही दिखला देना
एक नेक इंसान बना दो ए मालिक मौला मेरे ।
दुष्मन को भी दोस्त बनाकर भर लो अपनी बाहों में
बुजदिल को निडर बना दो डर समा है निगाहों में
मालिक मेरे मौला मेरे एक नेक इंसान ।

बी पी षर्मा ;बिन्दु

3 Comments

  1. mani mani 29/05/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 29/05/2016
  3. संदीप कुमार सिंह संदीप कुमार सिंह 29/05/2016

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