प्रेम कविता

आत्महत्या का बेहतरीन तरीक़ा होता है
इच्छा की फ़िक्र किए बिना जीते चले जाना
पाँच हज़ार वर्ष से ज़्यादा हो चुकी है मेरी आयु
अदालत में अब तक लम्बित है मेरा मुक़दमा
सुनवाई के इंतज़ार से बड़ी सज़ा और क्या

बेतहाशा दुखती है कलाई के ऊपर एक नस
हृदय में उस कृत्य के लिए क्षमा उमड़ती है
जिसे मेरे अलावा बाक़ी सब ने अपराध मना

संविधान की क़िताब में इस पर कोई अनुच्छेद नहीं।

One Response

  1. pradeepmishra 14/05/2015

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