नश्तर – मेरी शायरी……. बस तेरे लिए

नश्तर

मोहब्बत में रखे थे कदम संभल संभल कर ……………………..
फिर भी फिसल गए उनकी सूरत देख कर
उसने ऐसे नश्तर चलाये हमारे दिल पर …………………………..
के अब तक दर्दे दिल की दवा ढूंढ रहे हैं हम

शायर : सर्वजीत सिंह
sarvajitg@gmail.com

4 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 28/05/2016
  2. sarvajit singh sarvajit singh 28/05/2016
  3. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 29/05/2016
  4. sarvajit singh sarvajit singh 29/05/2016

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