मैँ बनूँगा शायर

मैँ बनूँगा शायर,
एक दिन,
अपने दिल की,
बात बताई,
क्या करोगे,
शायर बन के?,
क्या होगा भविष्य,
सोचा है तुमने?,
कड़कती सी आवाज़,
पिता जी की आई,
मैंने भी,
हिम्मत करके,
अपने दिल की,
बात सुनाई,
पिताजी मुझे.
माफ़ कीजिये,
मेरी बात पर,
ध्यान दीजिये,
शायरी में,
ना आरक्षण,
ना भ्रस्टाचार का,
शौर है,
ना प्रदूषण की चिंता,
ना किताबो का बोझ है,
ना किसी की किटकिट,
ना परेशानियों का जोर है,
शब्दों से शब्द खेलते है,
और कल्पनाओं का दौर है,
मेरे पिता जी हँसे बहुत हँसे,
फिर बोले बेटा,
पेट की भूख,
कैसे बुझाओगे?
अपने परिवार का,
बोझ कैसे उठाओगे?
हर किसी ने,
खुद को बंद कर लिया,
चार दिवारी में,
हर कोई व्यस्त,
मोबाइल पर,
टी वी पर,
सी डी पर,
तुम किसको,
अपने शब्द सुनाओगे,
लचर गीतों में,
उत्तेजित कहानियो में,
शब्दों से खेल,
खुद सकूँ से,
रह पाओगे,
कोई सच सुनेगा नहीं,
कोई सच लिखेगा नहीं,
सनसनी ना बन जाये,
तब तक,
उन शब्दों को,
कोई खरीदेगा नहीं,
मेरी आँखों में अश्रु थे,
चेहरे पर चुप्पी,
मैँ बनूँगा शायर,
एक दिन,
अपने दिल की बात बताई,

मनिंदर सिंह “मनी”

3 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 28/05/2016
    • mani mani 28/05/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 28/05/2016

Leave a Reply