तूँ! मेरी गोलू मटोलू…

Bhagchand Ahirwarतूँ! मेरी गोलू मटोलू…
मैं, तेरा! छेल-छबीला, नाम भोलू…
इश्क़ की गली, मोहल्ला मोहब्बत वाला
मैं! तेरे लिए लाया, हैदराबादी कानों के भाला

तूँ! गुलकंद सी मीठी
मैं! शकरकन्द सा मीठा
आ, दोनों मिल, रचे ऐसा काव्य, जो हो उम्दा मीठा
बेटी हो रस-मलाई, बेटा भी गुलाब-जामुन जैसा
जिनसे भी मिले वो,
कर दे उसे अपने जैसा

हाँ-हाँ, मैं! तेरी गोलू-मटोलू
पर सुन,मेरी भी, ओ मेरे भोलू
मैं! एक ही मिठाई जनूँगी,
उसके बाद तो मैं!
अपनी अम्मा की भी न सुनूंगी

इतनी गरम न हो, ओ मेरी जानू
जो, तूँ! कहे हैं, वो सब मैं मानू
क्योंकि…तूँ! है,मेरी गोलू-मटोलू…
मैं! तेरा, प्यारा-सा भोलू…
कवि-भागचन्द अहिरवार “निराला”

2 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 28/05/2016
    • Bhagchand Ahirwar भागचन्द अहिरवार "निराला" 29/05/2016

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