वो चला गया जो मेरा था

वो चला गया जो मेरा था , जिसके वचनो का रंग सुनहरा था
मेरे रूप रंग की झलकी पर , जिन आँखों का पहरा था …..

मेरे दुनिया में आने पर , जिसको मुस्काते पाया था
मेरे नन्हे कदमो का , जिसने जशन मनाया था …
वो चला गया जो मेरा था ………..

पापा पापा कह जब में , उनको आवाज लगाती थी
अपनी तमनओ की , जब लम्बी लिस्ट सुनाती थी
कभी गुड़िया , कभी गाडी , कभी टॉफ़ी ये चॉक्लेट भारी
ले आते थे वो सब , जो मैं उन से कहती जाती थी ……
वो चला गया जो मेरा था ……………..

मेरी आँखों के आंसू, जिन्हे बिलकुल ना भाते थे
वो मेरे पापा थे ,जो गमो में भी मुस्कुराते थे …
मैं जिस पल खुद की हार का शोक मनाती थी
वो पापा थे , जो मुझको जिंदगी जितना सीखते थे
वो चला गया जो मेरा था …………….

मेरी गुड़िया , मेरी चिड़िया , मेरी नन्ही सी परी
और ऐसे ही कई नामो की लगा देते थे झड़ी ……
कभी मेरी, चाहत जो रह जाती थी कंही
मेरे पापा ले आते थे वो सारी बांध कर सभी
वो चला गया जो मेरा था ………………….

ओ पापा , मेरे पास लौट आओ ना …
ओ पापा , मुझे भी साथ ले जाओ ना

नहीं चाहिए मुझे , ये पैसे , ये गुड़िया , ये महंगी घडी
मुझे रहना है तेरे आशियाने में ,
तेरी पलकों , तेरी आँखों के इस शामियाने में…

वो चला गया जो मेरा था ………………………

7 Comments

  1. babucm babucm 28/05/2016
    • tamanna tamanna 28/05/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 28/05/2016
  3. babucm babucm 28/05/2016
    • tamanna tamanna 28/05/2016
  4. Rajeev Gupta RAJEEV GUPTA 28/05/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 29/05/2016

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