मैं हूँ गुड़िया तेरी बाबा

में हु गुड़िया तेरी बाबा , हर रोज़ तुझे बतलाऊँगी
हर बार मरूंगी में तन से , मन से जी कर दिखलाऊँगी

मेरे मन पर , तेरी सादगी का जो निशा बना,
मैं उसी निशा से खुद को पारस करती जाऊँगी
मैं हूँ गुड़िया तेरी बाबा …………………………..

तूने जो मुझको सीखा दिया , मैंने इस मन में छीपा लिया
तूने जो मुझसे कहा नहीं , वो भी इस मन में बसा लिया
मैं हूँ गुड़िया तेरी बाबा ……………………………….

तेरे साये से जो मिला मुझे , उसका तोह कोई मोल नहीं
जो आंसू गीरा तेरी आँखों से , वो तो किसी को दिखा नहीं
मैं हूँ गुड़िया तेरी बाबा ………………………………………

मेरी शादी के दिन , तेरी आँखों में भी सपने थे
इस रंग बिरंगी दुनिया में , कुछ ही तोह बस अपने थे
मैं हूँ गुड़िया तेरी बाबा ………………………………………

मैं हर बार जियु तेरे लिए , उस रब से मैंने मांग लिया
मेरा खुदा , रब भी तू , बस इस दिल ने मान लिया
मैं हूँ गुड़िया तेरी बाबा……………………………..

7 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 28/05/2016
    • tamanna tamanna 28/05/2016
  2. babucm babucm 28/05/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 28/05/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 28/05/2016
    • tamanna tamanna 28/05/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 29/05/2016

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