कश्मकश

गीतों को जब गया जाता , मन को कुछ बहलाया जाता
तभ एहसास का दर्पण हमें देखता है , और हर दम हम से ये पूछता है
कौन है हम , हमारा लक्ष्य है क्या , इस जीवन का सत्य है क्या

मगर आना जाना हमें है न भाता , शब्दों का जाला भी ना समझा पाता
शब्दों के घेरे में फँस कर के हमने , हमेशा हर एक को है आपने ही माना

मगर ये जो अपने है माया के भूखे, भावनाओ की कद्र ही है कौन करता
मन का एहसास रह रह के डोले , कौन है अपना किसे अपना बोले

अब तोह शायद बस युँ ही लिख कर ये कविता , एहसासो को अपने इसमें उतारे
क्योंकि इस जीवन में आकर , वाणी से ज्यादा हम शब्दों को संवारे……………..

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