फ़साना -ए -दिल

रुक – जा, सवेरे वो आएगा….
अंधेरो से उजालो की ओर ले जाएगा.

धीरे से आँचल लहराएगा ….
चुपके से छू-कर चले जाएगा .

थोड़ी शरारत कर जाएगा ….
दिल में ख़्वाबों का आशियाँ बनाएगा .

शब्दों से कुछ भी ना कह पाएगा ….
वादा वो नैनों से दे जाएगा .

राहों में कांटे बिछे हो मगर ,
फूलों की चादर बिछा जाएगा .

सांसो से खुशबू महका जाएगा ….
पलकों से आंसू वो ले जाएगा .

अपना हाथ , वो हाथो में दे जाएगा …..
हर परेशानी अपने साथ ले जाएगा .

देखते ही देखते , एक अफ़साना बन जाएगा ……
और , ये ख़्वाब फ़साना -ए -दिल कह जाएगा .

रुक – जा, सवेरे वो आएगा….

3 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 27/05/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 28/05/2016
  3. C.M. Sharma babucm 28/05/2016

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