मेरा भगवान्

ये जीवन है तेरा , इस जीवन पर है क़र्ज़ तेरा
मुझे जरूरत नहीं रब की , तू जो है रब भी मेरा

मेरी माँ के आँचल से चलती है जो मस्त हवा ,
उस आँचल के में हूँ सदके , जिस में है भरा सुकून बड़ा

उन् प्यार भरे शब्दों को सुन कर , में तोह बस जी लेती हूँ
वरना इस जीवन में जीने को , दुनिया में है दर्द बड़ा

उसको हर पल फ़िक्र मेरा , मेरे जीवन में खुशियों का
वैसे तोह उसके मन में , छुपा हुआ है दर्द बड़ा

में अब सायानी हूँ ,माँ , ये कह कह कर ,में चिलाती थी
बस कर माँ , में बड़ी हुई , कह कर रॉब जताती थी

वो बस हंस कर, मुझको , पगली कह कर बुला थी
तू है भोली मेरी बच्ची , मुझको ये कह कर सहलाती थी

ये सब बातें उस पल की है जब में छोटी बची थी
अब समझी हूँ में माँ , तू क्यों मुझ पर मुस्काती थी

माँ बनकर मैंने समझा ,सब माँ एक जैसी होती है
खुद तो दुःख सह लेती है ,पर मुंह से कुछ ना कहती है

मुझको नहीं चाहिए , धन दौलत , ये महल कीमती पत्थर
मुझको चाहिए बस तू ही , तेरा आँचल और वो बचपन का घर

6 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 28/05/2016
    • tamanna tamanna 28/05/2016
  2. C.M. Sharma babucm 28/05/2016
  3. Rajeev Gupta RAJEEV GUPTA 28/05/2016
    • tamanna tamanna 28/05/2016
  4. mani mani 28/05/2016

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