कोई सागर की जगी प्यास बुझाए कैसे

कोई सागर की जगी प्यास बुझाए कैसे,
आसमां को करीब उसके लाए कैसे ।
चाहना कुछ भी मुमकिन इस जहाँ में मगर,
कोई चांदनी को अपनी दुल्हन बनाए कैसे ।
जख्म के खौफ से खौफजदा हैं लोग इतने,
कोई काँटों से फूलों को छुड़ाए कैसे ।
जिनसे साये भी जुदा-जुदा से रहते हों,
कोई उनके करीब आये तो आये कैसे ।

विजय कुमार सिंह

7 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 27/05/2016
    • विजय कुमार सिंह 27/05/2016
  2. babucm babucm 27/05/2016
    • विजय कुमार सिंह 27/05/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 27/05/2016
    • विजय कुमार सिंह 27/05/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 28/05/2016

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