याद आते हो ।

याद आते हो ।

फू लों के बागों में
महकते ख्वाबों में
सुन्दर तालाबों में
मुझे तुम याद आते हों ।
होता हूं जब अकेला
होता है चारों तरफ
दुनिया का मैला
मगर न जाने क्यों ?
मुझे तुम याद आते हों ।
दूर सुदूर आकाश में
दूर किसी क्षितिज पे
मिलता है गगन धरती से
देखूं वहां दिखाई देते हो ।
मुझे तुम याद आते हों ।
तारों भरी रात में
छत पर लेटे हुए
ख्वाबों में तुम्हारे खोकर
बुलाता हूं चले आओ ।
मुझे तुम याद आते हों ।

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