याद आता चेहरा

याद आता चेहरा

आज फि र न जाने क्यों
याद आता है चेहरा तेरा ।
तुम्हें सोच-सोचकर ही
मन उद्विग्र होता है मेरा ।
आंखें जैसे एकटक सी
और जिस्म साधे एक चुप्पी
देखता है राह तुम्हारी
आंखें चाहती हैं बस यही
कब होगा दीदार तेरा ।
आज फि र न जाने क्यों
याद आता है चेहरा तेरा ।
आज वो तन्हाईयां भी जैसे
डसती हैं जोर से मुझे
पागल सा हो गया हूं मैं
पाना चाहता हूं मैं तुझे
चाहता हू मैं सहारा तेरा ।
आज फि र न जाने क्यों
याद आता है चेहरा तेरा ।

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