तुम्हारी हंसी

तुम्हारी हंसी

मोती ही मोती
तुम बिखेर जाती हो
जब होठों पर तुम्हारे
मंद हंसी तुम लाती हो ।
लालीयुक्त होंठ तुम्हारे
खुलते हैं जब मंद-मंद
अन्दर चमका कर यामिनी
विलीन अन्दर ही
तुम कर जाती हो ।
जब होठों पर तुम्हारे
मंद हंसी तुम लाती हो ।
फ डफ़ ड़ाते ये होंठ तुम्हारे
रोक नही पाते बिजली को
कि सी भी तरह से
झलक अन्दर की
दिखला ही जाती हो ।
जब होठों पर तुम्हारे
मंद हंसी तुम लाती हो ।

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