तेरी याद

तेरी याद

एक आहट सी करीब आकर,
ज्यों हवा में बदल जाती है,
तेरी यादें भी ठीक उसी तरह
आकर धूमिल हो जाती हैं ।
मगर तुम हो कि—–
कभी पास आकर भी
हमारे पास से गुजर जाती हो,
हमें क्या मालूम था कि
बेवफा तुम नही
बल्कि हम ही थे
जो लगाया तुमसे ही दिल
अब भुगत रहे हैं उसकी सजा
तुम जा-जाकर बेगानों से
खुलकर रहे हो मिल
ये भी कोई मिलन है
मिलना ही है तो मिलो
मुझे उससे क्या ?
मगर ना मिलना
हमसे तुम आईंन्दा ।

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