हे मेघों

हे मेघों

प्यासा है तेरी बूंदो का
ये सारा जहान,
बरसाओ पानी मेघों से
हे इन्द्र देव महान ।
धरती का पानी भी अब
प्यास नही बुझा सकता
चातक पक्षी की भांति
हाल हुआ है प्रभु हमारा
धुंए, धूप को समझ पानी
मर रहे हैं इंसान ।
बरसाओ पानी मेघों से
हे इन्द्र देव महान ।
भूमि भी शुष्क आंखों से
देख रही एकटक ऊपर को
आंचल रूपी बादल संहित
धरती ऊपर बरस पड़ो
बरसाकर बहुत सा पानी
आल से आल का करो मिलान ।
बरसाओ पानी मेघों से
हे इन्द्र देव महान ।

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  1. babucm babucm 27/05/2016

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