वह परेशान दिखती है

वह परेशान दिखती है
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वह नजरे झुकाए बैठी है
गमो को दिल से लगाए बैठी है
आंखो को नम किए बैठी है
खुद को कहीं गुम किए बैठी है।

पर क्यों ?

न ही वह कुछ कहती है
न ही वह कुछ सुनती है
न ही वह खुश रहती है
न ही कुछ समझती है।

उसे यूं ही बैठे रहना मुझे ठीक नहीं लगता
तरह तरह की सवाल उत्पन्न होती है
मेरा मन भी भाऊक हो उठता है
न जाने किस और चल बैठता है।

सारे गमो को भूल तुम हँसती रहो
अपने चेहरो से चाँदनी बरसाती रहो
खुश रहो और मुसकुराती रहो
जिंदगी का क्या?
उतार-चढ़ाव तो लगी रहती है।

संदीप कुमार सिंह
8471910640

6 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 27/05/2016
    • संदीप कुमार सिंह संदीप कुमार सिंह 28/05/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 27/05/2016
    • संदीप कुमार सिंह संदीप कुमार सिंह 28/05/2016
  3. C.M. Sharma babucm 27/05/2016
    • संदीप कुमार सिंह संदीप कुमार सिंह 28/05/2016

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