“क्षणिकाएँ 2”

बातों का मौसम भी अजीब होता है ।
तीखी बातें सर्द हवाओं की तरह होती हैं;
जब भी चलती हैं बस ठिठुरन बढ़ा जाती हैं ।

तेरी यादों का पुल्लिन्दा तकिए के सिरहाने रखा है ।
फुर्सत के पलों में जब जी चाहा खोल लिया;
जब जी चाहा बाँच लिया ।

नफरत निभाना सब के बस की बात कहाँ ?
इस के लिए भी मुहब्बत से अधिक;
शिद्दत की जरुरत होती है ।

“मीना भारद्वाज”

10 Comments

  1. ALKA प्रियंका 'अलका' 26/05/2016
    • Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 27/05/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 26/05/2016
    • Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 27/05/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 26/05/2016
    • Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 27/05/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 26/05/2016
    • Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 27/05/2016
  5. C.M. Sharma babucm 27/05/2016
  6. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 27/05/2016

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