सामने जिंदगी खड़ी थी

लम्हा लम्हा जोड़कर बनी इक कड़ी थी,
खुद की लिखी इबारत पर धूल सी पड़ी थी ।
मुस्कुराने को मिली थीं सारी उम्र मगर,
हंसी आ न सकी सामने जिंदगी खड़ी थी ।

विजय कुमार सिंह

11 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 26/05/2016
    • विजय कुमार सिंह 26/05/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 26/05/2016
    • विजय कुमार सिंह 26/05/2016
  3. ALKA प्रियंका 'अलका' 26/05/2016
    • विजय कुमार सिंह 27/05/2016
  4. Abhishek 27/05/2016
    • विजय कुमार सिंह 27/05/2016
    • विजय कुमार सिंह 01/06/2016
  5. babucm babucm 27/05/2016
    • विजय कुमार सिंह 27/05/2016

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