आज पता चला मेरे दिल को – ऋचा यादव

आज पता चला मेरे दिल को
की न्याय नहीं मिलता है सबको .
जानकार दिल ये बहुत दुखी हुआ
की एक निर्दोष को दोषी बना फ़ासी पर लटका दिया .
वैसे तो कितने गुनाह होते होंगे
इस दुनिया में ,पर उसका गुनाह
तो गुनाह हो के भी गुनाह ना था
किशोरावस्था में ही उसकी इज्जत
को तार -तार एक हैवान कर रहा था .
चाहती तो वो भी थी की उसकी ये
अनकही कहानी इस जहां क़ी गुमनाम
गलियों में युही गम हो जाय .
उसकी दर्द भरी दास्ताँ इस
समाज को ही नहीं बल्कि उसके परिवार
को भी नज़र ना आये .
पर शायद खुदा को भी ये
बिलकुल भी गवारा न था .
और इसलिए उसने बदलदी उस
मनहूस रात की वो बेज़ुबान कथा .
खुदा ने इतनी हिम्मत और
जोश बरपाया उस रात उस पर .
की फिर उसको ना रह गयी अपनी
और इस खोखले समाज की फ़िक्र .
रह गया तो बस अपने
अपमान का बदला लेना
और शायद इसलिए उसने धिक् समझा
बलात्कारी को खुद सजा देना .
अदालत में लड़ते -लड़ते शायद
उसे वो सच्चा न्याय ना मिलता
आखिर उसने बलात्कार की कोशिश करने
वाले को चाक़ू घोप दिया था .
इस गुनाह की सज़ा में उसे
जैलनुमा कब्र में उन्नीस
साल तनहा ज़िन्दगी जीने दिया .
सर उढा के नहीं बल्कि एक
नृशंस हत्यारिन बनाकर
उस कब्र में मरने के लिए छोड़ दिया .
उसके खूबसूरत नाखूनों के लिए
जब उसे जेल में चोट पहुंचाई गयी
तो एक बात इस जहां में सिद्ध हो गयी ,
की इस जहां में किसी की ख़ूबसूरती
की कोई कद्र नहीं होती .
होती है तो बस पैसों और
ऊचे ओहदों वालों की .
आज ईरान की छब्बीस बरस
की रेहाना जब्बारी को फ़ासी
पर तो लटका दिया गया .
शारीर तो साथ छोड़ रहा था
पर उसका विश्वास और हिम्मत
ईरान का कानून तोड़ न पाया .
खूबसूरत विचारों से लबरेज़ रेहाना
खुद को मिट्टी न बनने देना चाहती थी .
अपने जज़बे के साथ वो अपने हर
अंग को दान में देना चाहती थी .
इस दुनिया की अदालत ने तो उसे
कातिल और गुनहगार बना दिया
और वो कुछ न कर पायी .
पर अल्लाह की अदालत में
सबको गुनहगार ढहराने की
थी अब उसकी बारी आई .
दिल से दुआ निकल रही है आज
की वो उस पाक अदालत में जीत जाय .
और हर देश में अपने अपमान
का बदला लेने के लिए हर लड़की
में एक नयी रेहाना जाग जाय .

2 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 26/05/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 26/05/2016

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