कुछ न था

कुछ न था

गम बहुत सारे मिले
मगर कोई अपना न था
जिसके सहारे लगाता दिल
ऐसा कोई हमदम न था ।
आंखों में अश्रु दिल में प्यार
भटकता रहा द्वार-द्वार
चल रही थी ठंडी बयार
मगर कोई शोला न था ।
जिसके सहारे लगाता दिल
ऐसा कोई हमदम न था ।
आरजू का फू ल लिए मैं
जलाए राह में कई दिये
दिये बुझ गए वो सारे
रास्ता ही कुछ अच्छा न था ।
जिसके सहारे लगाता दिल
ऐसा कोई हमदम न था ।

One Response

  1. C.M. Sharma babucm 26/05/2016

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