मन्नू : तृतीय अंक

लकड़ी की तख्ती, लकड़ी की कलम
और मिटटी से भरी दवात
पानी भरता था इसमें प्रतिदिन
मस्सी भरने के शीध्र पश्चात

ऐसे अक्षर पहचाने थे
प्राथमिक पाठशाला गुमटी मे
जन्म राजधानी मे लिया
और शिक्षा गुमटी की मिटटी मे

खतरोँन के जल मे नित्य
स्नान किया करता था
शीतल पानी के श्रोत से
गर्मियों मे अमृत भरा करता था

घंटी बजते ही दौड़ लगाकर
घर आया करता था
तत्पश्चात नवीन कोपलों मे
जल चढ़ाया करता था

जब गाय चराने जंगल जाता
लकड़िया भी तोड़ लाता था
घर आता था भूखा प्यासा
गुड-काली रोटी खाता था

खाना बनाना, घास काटना
धान रुपाई भी करता था
घर के काम निपटा लेने पर
थोड़ा पढ़ाई भी करता था

नयी किताबें देखकर वो
फुले नहीं समाता
उनमे बांश पेपर के कपडे
पहना कर ले जाता

2 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 26/05/2016

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