तू निडर बन…

क्यों तू एक कायर की भाति अपनी ज़िन्दगी से भाग रहा हैं ?
तू उस पर्वत की तरह निडर बन जो किसी भी आंधी या तूफ़ान के सामने अपना मस्तक झुकता नहीं हैं.
तू उस पेड़ की तरह निस्वार्थ बन जो खुद धुप को सेहन कर दूसरों को छाव देता हैं .
तू उस पक्षी की तरह सहनशील बन जो हवा के झोंके से डर कर अपना घर बनाना नहीं छोड़ता हैं.
तू उस चींटी की तरह मेहनती बन जो कितनी बार भी गिर जाये पर हार नहीं मानता हैं.
तू उस पशू की तरह वीर बन जो अपने बच्चे के लिए शेर से भी लड़ जाता हैं .
तू उस बच्चे की तरह ज़िद्दी बन जो चाहे कितनी बार भी क्यों न गिर जाये पर वो अपनी ज़िद्द छोड़ता नहीं हैं.
तू उस सैनिक की तरह फौलादी बन जो खुद क्यों न मीट जाए पर देश पर आंच भी नहीं आने देता हैं.
तू उस योद्धा की तरह जाबाज़ बन जो अगर युद्ध में घायल क्यों न हो जाए पर जंग छोड़ के भागता नहीं हैं.
चाहे कुछ भी क्यों न हो जाए तू डरना नहीं क्यूंकि ज़िन्दगी उसी का साथ देती हैं जो गिर कर सम्भलता हैं.
ज़िन्दगी से लड़ना सीख न की उससे भागना, क्योंकि तू उस माँ का बेटा हैं जो खुद दर्द सेहन कर अपने बच्चे को जनम देती हैं.

-विनया पणिकर

2 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 26/05/2016
  2. C.M. Sharma babucm 26/05/2016

Leave a Reply