दुश्मन जमाना है

शाम तो ढल गयी साकी तेरे पास आना है,
अपनी आगोश में ले ले वादा तो निभाना है ।
दिन तो ढल जाता है, रात है कि जाती नहीं,
तेरे पास आने का बस बाकी यही बहाना है ।
साथ निभानेवाला साथी तो बिछड़ गया,
अब उसकी याद में ही जीवन बिताना है ।
लोग कहते हैं कि मैं पीकर झूमता हूँ,
नहीं पीनेवालों का मुझपर ही निशाना है ।
तुझे दोस्त बनाना भी मजबूरी हो गयी,
क्या करें हम भी जब दुश्मन जमाना है ।

विजय कुमार सिंह

11 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 25/05/2016
    • विजय कुमार सिंह 26/05/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 26/05/2016
    • विजय कुमार सिंह 26/05/2016
    • विजय कुमार सिंह 26/05/2016
      • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 26/05/2016
        • विजय कुमार सिंह 26/05/2016
  3. C.M. Sharma babucm 26/05/2016
    • विजय कुमार सिंह 26/05/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 26/05/2016
    • विजय कुमार सिंह 26/05/2016

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