गम छुपाने को

गम छुपाने को

मुस्कुराता हूं
ताकि गम छुपा रहे
मगर आंखें बयां कर देती हैं ।
गाता हूं
ताकि गम छुपा रहे,
मगर आवाज बयां कर देती है ।
एक तो जुदाई का तेरे
दुजा नौकरी का मेरे
मिलकर बना है भारी गम
फि र भला क्या मुस्कुराऊं
मुस्कान में भी सच भर देती है ।
मुस्कुराता हूं
ताकि गम छुपा रहे
मगर आंखें बयां कर देती हैं ।
सोचता था गम को भुलाने हेतु
कोई गीत मैं गुनगुनाऊं
मगर आवाज भी बेवफ ा निकली
अब गाने जो बैठा मैं
स्वर टुटा हुआ देती है ।
मुस्कुराता हूं
ताकि गम छुपा रहे
मगर आंखें बयां कर देती हैं ।

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  1. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 25/05/2016

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