बावरी गोपी

बावरी गोपी

कौन नगरिया, कौन डगरिया
श्याम तोहे ढूंढे, राधा बावरिया ।
मथुरा, वृदावन, गोकुल
ढूंढा श्याम तोहे ब्रज में
तोहे पाने गई मैं अकेली
उस यमुना के तट पे
दर्शन दो ओ नन्द के लाला
भई हूं मैं अजब दुखैया ।
कौन नगरिया, कौन डगरिया
श्याम तोहे ढूंढे, राधा बावरिया ।
पूरे वृंदावन में मैं घुमी
पाने को तोरी मैं रज धूली
मगर अंत में ना पाके तोहे
बैठी एक कदम की डारि
यमुना तट पर ना मिले कन्हैया।
कौन नगरिया, कौन डगरिया
श्याम तोहे ढूंढे, राधा बावरिया ।
तट यमुना का सूना – सूना
सारा ब्रज मोहे लागै धूना
कन्हाई तोरि लीला ये कैसी
जो आज कहीं भी न होती
कैसी रास श्याम तुम हो रचैया ।
कौन नगरिया, कौन डगरिया
श्याम तोहे ढूंढे, राधा बावरिया ।

2 Comments

  1. Anish35a@ kinjal 25/05/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 26/05/2016

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