श्वेत बगुले

श्वेत बगुले

ऊंचे नील गगन में ,
पंक्तियों में श्वेत बगुले ।
लगते हैं अति सुंदर
मन को करते हर्षित
लम्बी गर्दन खुले पंख
लगता विचित्र आकर्षण
संध्याकालिन जब ये उड़ते
ऊंचे नील गगन में ,
पंक्तियों में श्वेत बगुले।
मन मेरा लेता उडारी
चढ़ देखूं जब अटारी
मन चंचल बन उड़ता
फै ला अरमानों की झोली
जब-जब देखूं इनको मैं ।
ऊंचे नील गगन में ,
पंक्तियों में श्वेत बगुले ।

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