घर की याद

घर की याद

मुझे न जाने क्या हो गया
जब घर याद आया ।
मेरे कदम थिरकने लगे
होठों ने गीत गया ।
जब घर याद आया ।
घर जाने की तैयारी मैनें
कर ली थी एक सप्ताह पहले
मगर कोई बहाना नही बनाया ।
जब घर याद आया ।
आज घर जाने को
मिला एक प्यारा बहाना
उसी बहाने ने घर पहुंचाया ।
जब घर याद आया ।
मुझे लगाव है मेरे घर से
प्रेम मिलता है वहां से
पे्रम पाने घर का शहर से आया ।
जब घर याद आया ।

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