धरा की शोभा

धरा की शोभा

प्रकृति की शोभा है न्यारी
इसी से धरा लगती है प्यारी ।
धरती पर हैं जीव विचित्र
होता है आंखों का भ्रम
लगते हैं अनोखे प्यारे चित्र
प्रकृति का रूप है हरियाली।
प्रकृति की शोभा है न्यारी
इसी से धरा लगती है प्यारी ।
मन मोह लेती है प्यारी झलक
जब उजड़ता देखता हूं इसे
आंखों से अश्रु जाते है छलक
प्रकृति हमें है प्राणों से प्यारी
प्रकृति की शोभा है न्यारी
इसी से धरा लगती है प्यारी ।
पाने के लिए ऐसो आराम
आज के युग में मानव ने
पृथ्वी को कर दिया विरान,
पेड़ लगाओ हरियाली बढाओ
प्रकृति की शोभा है न्यारी
इसी से धरा लगती है प्यारी ।

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