कीमत करोड़ एक मोमीन की लाश की

धर्म से टले नहीँ जो कर्म से हिले नहीँ जो
जंगलों में खायी रोटियाँ जिन्होंने घास की
आज उन बलिदानियों की वंशावली बनी
अपनी ही भूमि पे वजह उपहास की
राजनेताओं की दोगलेबाजी ना दिखती है
बन बैठे सब ही औलादें सूरदास की
नारंग की लाश की बेकदरी दिखी ना और
कीमत करोड़ एक मोमीन की लाश की

कवि देवेन्द्र प्रताप सिंह “आग”
9675426080
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